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Tuesday, May 8, 2018

Hindi poems on women issues...

मेरी पढाई भी उतनी,
औहदा भी उतना,

इज़्ज़त भी उतनी,
तनख्वा भी उतनी,
तुम्हारा बड़ा है
तो अहंकार,
और छोटी है
तो तुम्हारी सोच...
 #DomesticAbuse

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कभी पूछ ही लेते 
शाम की चाय के लिए 
 ताउम्र तरसी हूँ मैं 
किसी और ज़ायके के लिए...
#genderbiasroles

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कुछ कहने से पहले 
कई बार सोचती हु मैं 
बुरा लगने पर कही मुझे 
छोड़ तो ना दोगे..
#TeenTalak
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दिन ढलने  से पहले 
घर आ गयी हूँ  मैं
माँ कहती है 
शाम को बाहर
भेड़िए आते हैं ...
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कुछ कहते कहते रुक जाना
एक दूसरे के कानो में बुदबुदाना
हम औरतों की बातों में 
अमूमन दर्द भरे होते हैं... 
#womenforwomen 
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तुमने उसको पहले देखा
या तुम उसके सामने पड़ी क्यूँ
ग़लती कई बार उसकी होती है 
जो दबाया जा सकता है...
#womenshaming
______________

उसको हुई नहीं हुआ है
लड्डू
उसकी हुआ नहीं हुई है
मौत...
 #femaleinfanticide
I didn't know any other way to vent out my anger and rage other than writing these lines. Hopefully someday world will be a fair place, atleast for humans! 

3 comments:

  1. Looks like you have covered most of the important issues associated with women.

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  2. I just hope that the perversion that leads to abuse of women ends once and for all.

    ReplyDelete

Thankyou for your feedback :)

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